बिहार चुनाव/सुपौल: बिजेंद्र प्रसाद यादव का 35 सालों का किला ढह पाएगा?

“पिछले 35 वर्षों में सुपौल विधानसभा में कई ऐसा गांव हैं जहां सड़क नहीं पहुंची है। पानी से उतरकर गांव जाना पड़ता है। मूलभूत समस्या के लिए आज भी लोगों को शहर से दूर जाना पड़ता है।” सुपौल विधानसभा क्षेत्र स्थित मरौना प्रखंड के बबलू राय बताते हैं। 

“विकास सिर्फ सड़क और बिजली नहीं है। माननीय बिजेंद्र प्रसाद यादव नीतीश कुमार के बाद जदयू के सबसे वरिष्ठ नेता हैं। इसके बावजूद उनके विधानसभा में ठीक-ठाक अस्पताल नहीं है। थोड़ी सी भी समस्या हो तो पटना आइए। रोजगार सबसे मुख्य समस्या है।” सुपौल विधानसभा क्षेत्र स्थित मरौना प्रखंड के लखन कुमार बताते हैं। 

“सुपौल में जूट उद्योग चीनी उद्योग और मखाना की बड़ी कंपनी खोली जा सकती है। लेकिन रोजगार के लिए निल बटे सन्नाटा। बाढ़ के नाम पर करोड़ों की लूट नेता और अधिकारी करते हैं। प्रत्येक साल बाढ़ आती है लेकिन कोई सरकारी प्रयास नहीं है।” सुपौल विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले मोहम्मद इम्तियाज बताते हैं।

सुपौल विधानसभा सीट पर तीन दशक यानी 35 वर्षों से लगातार बिजेंद्र यादव की धाक रही है। साल 1990 में राज्य में हुए सत्ता परिवर्तन के दौर में पहली बार सुपौल विधानसभा की सियासी सरजमीं पर बिजेंद्र यादव ने जनता दल के टिकट पर जीत से सियासी आगाज किया था, जो आज भी बदस्तूर जारी है। 1990 के बाद 1995 में भी जनता दल के ही टिकट पर जीते। इसके बाद 2000 में वे पहली बार जदयू के टिकट से विधायक चुने गए। फिर 2005, 2010, 2015 और 2020 में जदयू के टिकट पर बिजेंद्र प्रसाद यादव सुपौल से विधायक बने। इस बार भी मैदान में हैं।

पूरे कोसी क्षेत्र में बिजेंद्र प्रसाद यादव बड़ी राजनीतिक पकड़ रखते हैं। बिजेंद्र प्रसाद यादव केवल मंत्री नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के राजनीतिक सलाहकार भी माने जाते हैं। जब भी पार्टी या सरकार में कोई बड़ा निर्णय लेना होता है तो नीतीश कुमार उनका परामर्श जरूर लेते हैं। अब वर्ष 2025 में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जदयू चौथी बार यहां जीत दर्ज करेगी या विपक्षी महागठबंधन कोई नया इतिहास रचेगा।

मिन्नत रहमानी कितने प्रभावी? 

सुपौल से पहले युवा हल्ला बोल के संस्थापक अनुपम को टिकट मिला था। वे बेरोजगारी, युवाओं की समस्याएं, नीट पेपर लीक और पांच अभिशाप जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा में थे। इसी बीच सुपौल से कांग्रेस प्रत्याशी अनुपम का एक पोस्ट बड़ी तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट में अनुपम ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की वकालत करते नजर आ रहे हैं। हालांकि आखिरी दिन उससे टिकट वापस लेकर पूर्व प्रत्याशी मिन्नत रहमानी को सौंप दिया है।

कांग्रेस से जुड़े अमित बताते हैं कि,”मिन्नत रहमानी को टिकट देकर कांग्रेस के इस निर्णय से संगठन के भीतर एक राहत और संतोष की लहर दौड़ गई। स्थानीय स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। वे लगातार जनता के बीच सक्रिय रहे हैं और संगठन में उनकी साफ-सुथरी छवि के कारण कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रियता भी बनी हुई है। सबसे जरूरी बात सुपौल की सियासत में कांग्रेस ने आखिरी वक्त पर अपनी गलती सुधारकर न केवल पार्टी की इज्जत बचाई है, बल्कि साबित किया चुनावी मैदान में वही उतरेगा जो विचारधारा और अनुशासन दोनों के प्रति वफ़ादार रहेगा।”

मतदाताओं की चिंताएं और अपेक्षाएं

सुपौल कोसी नदी के प्रभाव क्षेत्र में आता है, इसलिए यहां के लोगों के लिए सबसे बड़े मुद्दे बाढ़ और उससे होने वाली तबाही हैं। इसके अलावा रोजगार और पलायन, शिक्षा और स्वास्थ्य और कृषि संकट है।

सुपौल के रहने वाले बिपुल पटना में जनरल कंपटीशन की तैयारी कर रहे हैं। वह बताते हैं  कि,”पूरे बिहार में कुछ शहर को छोड़ दिया जाए तो पूरे बिहार की समस्या एक ही है। रोजगार नगण्य और पलायन लाखों की संख्या में। बेहतर शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों की कमी एक बड़ा मुद्दा है।  लोगों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और इलाज के लिए पटना या अन्य बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है।”

वहीं तटबंध के भीतर रह रहे लोग एक स्थायी समाधान चाहते हैं, खासकर कोसी की बाढ़ से निपटने के लिए। वे चाहते हैं कि सरकार ऐसी योजनाएं बनाए जिससे हर साल होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। सुपौल के मतदाता विकास के ठोस वादों और उन्हें पूरा करने वाले उम्मीदवार को प्राथमिकता देते हैं। 

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